कार्तिक का पावन महीना चल रहा है और नवंबर 2026 त्योहारों की रौनक से भरा रहने वाला है। रोशनी का पर्व दिवाली, लोक आस्था का महापर्व छठ, भगवान विष्णु के जागने का दिन देवउठनी एकादशी और काशी की देव दीपावली, सभी इसी महीने पड़ रहे हैं। पंचांग के अनुसार, इस बार प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं।
दिवाली: 8 नवंबर (रविवार)
धनतेरस से शुरू होने वाला पांच दिन का दीपोत्सव इस बार नवंबर के पहले पखवाड़े में मनाया जाएगा। मुख्य दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर, रविवार को है। इसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज मनाए जाएंगे। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से ज़रूर पूछ लें, क्योंकि शहर के हिसाब से समय थोड़ा बदल सकता है।
छठ महापर्व: 13 से 16 नवंबर
झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी आस्था, छठ पूजा, इस बार 13 नवंबर से शुरू होगी:
- **13 नवंबर:** नहाय-खाय - **14 नवंबर:** खरना - **15 नवंबर:** संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) - **16 नवंबर:** उषा अर्घ्य और पारण
चार दिन के इस कठिन व्रत में व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। रांची, धनबाद, जमशेदपुर समेत झारखंड के तमाम शहरों में घाटों की तैयारी अभी से शुरू हो गई है।
देवउठनी एकादशी: 20 नवंबर (शुक्रवार)
मान्यता है कि आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से चार महीने की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु इसी दिन जागते हैं। इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इसी के साथ चातुर्मास समाप्त होता है और विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। कई जगह इसी के आसपास तुलसी विवाह भी होता है।
देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा: 24 नवंबर (मंगलवार)
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। वाराणसी के घाटों पर इस दिन लाखों दीये जलाए जाते हैं, जिसे देव दीपावली कहा जाता है। सिख समुदाय इसी दिन गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) भी मनाता है।
त्योहारों के इस मौसम में प्रशासन ने भी भीड़ और सुरक्षा को लेकर तैयारियां तेज़ कर दी हैं। श्रद्धालुओं से अपील है कि घाटों पर सावधानी बरतें और पर्यावरण का ध्यान रखते हुए पर्व मनाएं।
*(तिथियां प्रचलित पंचांगों पर आधारित हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार मामूली अंतर संभव है।)*